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टैक्स

Airdrop और staking reward पर टैक्स कैसे लगता है

मुफ़्त में मिले टोकन पर भी टैक्स बनता है, और वह दो बार बन सकता है। कब, कितना, और किस क़ीमत पर।

2 मिनट का पाठ · टैक्स

“मुझे तो मुफ़्त में मिला था” यह सबसे आम जवाब है जो मुझे airdrop के बारे में मिलता है। और यही सबसे महँगी ग़लतफ़हमी है।

मिलने के दिन ही एक टैक्स बन जाता है

जिस दिन टोकन आपके वॉलेट में आया, उस दिन की उसकी बाज़ार क़ीमत आपकी आमदनी है।

मान लीजिए किसी दिन आपको ऐसे टोकन मिले जिनकी उस वक़्त क़ीमत ₹20,000 थी। वह ₹20,000 उसी साल की आमदनी है, चाहे आपने उन्हें छुआ तक न हो।

यही बात staking reward पर भी लागू होती है। हर बार जब reward जमा होता है, उस वक़्त की क़ीमत गिनी जाती है।

बेचने पर दूसरा टैक्स

अब मान लीजिए वही टोकन बाद में ₹35,000 के हो गए और आपने बेच दिए।

आपकी ख़रीद क़ीमत ₹20,000 मानी जाएगी, वही जो मिलने के दिन थी। मुनाफ़ा ₹15,000 हुआ, और उस पर 30% लगेगा।

यानी टैक्स दो बार बनता है, पर दो अलग चीज़ों पर। पहली बार मिलने पर, दूसरी बार उसके बाद की बढ़त पर। यह दोहरा टैक्स नहीं है, हालाँकि पहली नज़र में लगता वैसा ही है।

असली दिक़्क़त: गिरने पर क्या

यहीं लोग फँसते हैं।

टोकन ₹20,000 का मिला, आमदनी बन गई। फिर वह गिरकर ₹3,000 का रह गया और आपने बेच दिया। आपका नुक़सान ₹17,000 का हुआ।

वह नुक़सान किसी चीज़ से नहीं घटेगा। पर मिलने के दिन वाली ₹20,000 की आमदनी पर टैक्स फिर भी बनेगा।

मैंने ऐसे लोग देखे हैं जिनके पास टैक्स भरने लायक़ पैसा बचा ही नहीं, क्योंकि जिस चीज़ पर टैक्स बना वह ख़ुद ही गिर चुकी थी।

तो करना क्या चाहिए

जिस दिन कुछ मिले, उसी दिन तीन चीज़ें लिख लीजिए: तारीख़, कितनी मात्रा, और उस वक़्त की क़ीमत। बाद में यह पता करना लगभग नामुमकिन है।

और अगर airdrop बड़ा है, तो मिलते ही उसका एक हिस्सा बेचकर टैक्स का पैसा अलग रख देना समझदारी है। पूरा होल्ड करके बाद में टैक्स के लिए पैसे ढूँढना बुरी स्थिति है।

छोटे airdrop के लिए

दो सौ रुपये वाले टोकन के लिए यह सब करना बेमानी लगेगा। पर आदत वहीं से बनती है, और जिस साल कोई बड़ा airdrop आएगा उस साल यह आदत काम आएगी।

टैक्सभारतनिवेश

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Airdrop मुफ़्त मिला है, फिर टैक्स क्यों?

मिलने के दिन उसकी बाज़ार क़ीमत आपकी आमदनी मानी जाती है। मुफ़्त मिलने का मतलब क़ीमत शून्य होना नहीं है।

क्या टैक्स दो बार लगता है?

एक बार मिलने पर आमदनी के रूप में, और फिर बेचने पर मुनाफ़े पर। दूसरी बार सिर्फ़ उस बढ़त पर जो मिलने के बाद हुई।