जब कोई आपको कोई सिक्का बताए
टिप कहीं से भी आए, सवाल वही रहते हैं। चार सवाल जो ख़रीदने से पहले पूछने चाहिए।
कोई न कोई आपको कुछ न कुछ बताएगा। टेलीग्राम ग्रुप में, यूट्यूब पर, या दोस्त के ज़रिए। यह बंद नहीं होगा।
सवाल यह नहीं है कि टिप सुनें या नहीं। सवाल यह है कि सुनने के बाद क्या करें।
पहला सवाल: इन्हें क्या मिल रहा है
अगर किसी को आपके ख़रीदने से फ़ायदा है, तो वह सलाह नहीं, विपणन है।
कभी-कभी यह साफ़ होता है, जैसे कोई पहले से रखे हुए सिक्के की तारीफ़ कर रहा हो। कभी-कभी छिपा होता है, जैसे किसी को प्रचार के पैसे मिले हों और वह बताया न गया हो।
मैं ख़ुद affiliate लिंक इस्तेमाल करता हूँ और उन्हें बताता हूँ। बताने से वे ग़लत नहीं हो जाते। न बताना ग़लत करता है।
दूसरा सवाल: यह बात कब से चल रही है
अगर किसी सिक्के के बारे में हर जगह एक साथ बात होने लगे, तो आप शुरुआत में नहीं हैं। आप उस भीड़ में हैं जो बाद में आई।
जिन्हें पहले पता था वे अब बेच रहे होते हैं, और उन्हें आपके ख़रीदने की ज़रूरत है।
तीसरा सवाल: वजह क्या है
“यह चलेगा” कोई वजह नहीं है। “यह 10x जाएगा” तो बिल्कुल नहीं।
वजह यह होती है कि यह चीज़ क्या करती है, कौन इस्तेमाल करता है, और पैसा कहाँ से आता है। अगर बताने वाला यह नहीं बता पा रहा, तो उसे भी नहीं पता।
मैं यह जाँच ऐसे करता हूँ: क्या मैं इसे अपने पिता को आसान हिंदी में समझा सकता हूँ? नहीं समझा सकता, तो मुझे समझ नहीं आया।
चौथा सवाल: ग़लत होने पर क्या
टिप देने वाले के पास आमतौर पर इसका जवाब नहीं होता।
आपके पास होना चाहिए। किस बात पर आप मानेंगे कि यह ग़लत था, और तब आप क्या करेंगे। यह ख़रीदने से पहले तय होता है, बाद में नहीं।
एक बात जो भारत में मायने रखती है
हर बार जब आप किसी की बात पर अंदर-बाहर होते हैं, तो मुनाफ़े पर 30% कटता है और नुक़सान कहीं नहीं घटता।
यानी बहुत सारी टिप पर चलना यहाँ दोहरा महँगा है। एक बार ग़लत चुनाव से, दूसरी बार टैक्स से।
मेरी अपनी टिप के बारे में
मैं भी बातें करता हूँ। अगर मेरी किसी बात पर आप कुछ ख़रीद रहे हैं और ऊपर वाले चारों सवालों का जवाब आपके पास ख़ुद का नहीं है, तो मत ख़रीदिए।
किसी और के भरोसे पर ख़रीदी गई चीज़ गिरने पर आपके पास तय करने का कोई तरीक़ा नहीं होगा, क्योंकि सोच कभी आपकी थी ही नहीं।