क्रिप्टो में कितना पैसा लगाना चाहिए
रक़म का जवाब प्रतिशत में नहीं, एक सवाल में है। वह सवाल ज़्यादातर लोग ख़ुद से पूछते ही नहीं।
इसका कोई एक नंबर नहीं है, और जो आपको नंबर बता रहा है वह आपकी ज़िंदगी नहीं जानता।
पर एक तरीक़ा है जिससे आप अपना नंबर ख़ुद निकाल सकते हैं।
पहले वह सवाल
अगर यह पूरी रक़म कल ज़ीरो हो जाए, तो आपकी ज़िंदगी में क्या बदलेगा?
अगर जवाब है “बुरा लगेगा, पर चलता रहेगा”, तो रक़म ठीक है।
अगर जवाब में किराया, EMI, फ़ीस, या इलाज आ रहा है, तो रक़म ग़लत है। सिर्फ़ ज़्यादा नहीं, ग़लत।
यह सवाल कठोर लगता है क्योंकि है। क्रिप्टो में 70% गिरावट असामान्य नहीं होती, वह चक्र का हिस्सा है। जिस रक़म पर आप उस गिरावट में सो नहीं पाएँगे, वह रक़म आपसे ग़लत फ़ैसला करवा लेगी।
तीन चीज़ें पहले
उधार चुकाइए। क्रेडिट कार्ड 40% सालाना लेता है। क्रिप्टो में उतना कमाने की कोई गारंटी नहीं, और ब्याज गारंटी है।
छह महीने का ख़र्च अलग रखिए। आपात फ़ंड ऊबाऊ है और वही चीज़ है जो आपको गिरावट में बेचने से बचाती है। जिसके पास वह नहीं है, वह सबसे बुरे वक़्त पर बेचता है क्योंकि उसे बेचना पड़ता है।
बीमा देख लीजिए। एक अस्पताल का बिल पूरे पोर्टफ़ोलियो से बड़ा हो सकता है।
ये तीनों हो जाएँ, फिर क्रिप्टो की बात है।
अब रक़म
अलग-अलग लोग अलग प्रतिशत कहते हैं। मैं कोई संख्या नहीं दूँगा, क्योंकि आपकी उम्र, आमदनी, ज़िम्मेदारी और स्वभाव मुझे नहीं पता।
इतना कहूँगा: जितनी रक़म पर आप रोज़ क़ीमत देखने लगते हैं, वह रक़म ज़्यादा है।
यह कोई भावुक बात नहीं है। बार-बार देखने का सीधा असर यह होता है कि आप ज़्यादा ट्रेड करते हैं, और भारत में हर मुनाफ़े पर 30% कटता है जबकि नुक़सान कहीं नहीं घटता। यानी ज़्यादा हलचल आपको महँगी पड़ती है।
एक बार में मत डालिए
चाहे रक़म तय भी हो जाए, उसे एक दिन में मत लगाइए।
महीनों में बाँटकर डालने से आपका औसत भाव सुधरता है और एक ही दिन के फ़ैसले का बोझ हट जाता है। मैं इसी तरीक़े से चलता हूँ, और इस पर अलग से एक लेख भी है।
असली इम्तिहान
रक़म तय करने के बाद ख़ुद से पूछिए कि अगर यह आधी रह जाए तो आप क्या करेंगे।
अगर जवाब है “और ख़रीदूँगा” या “कुछ नहीं करूँगा”, तो आप तैयार हैं।
अगर जवाब है “पता नहीं”, तो रक़म कम कीजिए। और अगर जवाब है “बेच दूँगा”, तो अभी मत लगाइए, क्योंकि आप वही करेंगे जो नुक़सान को पक्का कर देता है।