क्रिप्टो टैक्स कैलकुलेटर
जितने का ख़रीदा और जितने का बेचा, बस इतना भरिए। यह 30% टैक्स, उस पर 4% सेस, और आपका पहले से कटा हुआ 1% TDS जोड़-घटाकर बता देगा कि असल में कितना देना बाक़ी है।
ट्रांसफ़र का ख़र्च अलग से इसलिए पूछा है क्योंकि मौजूदा नियमों में वह घटाया नहीं जा सकता, सिर्फ़ ख़रीद की क़ीमत घटती है। नीचे दोनों का फ़र्क़ दिखेगा।
नियम सिर्फ़ तीन हैं
- मुनाफ़े पर 30%। आपकी सैलरी किस स्लैब में है, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
- टैक्स पर 4% सेस। इसी वजह से असली दर 31.2% बैठती है।
- ट्रांज़ैक्शन पर 1% TDS। यह अतिरिक्त ख़र्च नहीं है, ITR में समायोजित होता है, और ज़्यादा कटा हो तो वापस मिलता है।
यहीं पर ज़्यादातर लोग फँसते हैं
नुक़सान को मुनाफ़े से नहीं घटाया जा सकता। मान लीजिए एक सिक्के में ₹50,000 का मुनाफ़ा हुआ और दूसरे में ₹50,000 का नुक़सान। आप बराबरी पर हैं, फिर भी ₹50,000 के मुनाफ़े पर टैक्स देना होगा। न वह कटेगा, न अगले साल आगे जाएगा। इसीलिए भारत में कई ट्रेडर ऐसे साल में भी टैक्स भरते हैं जिसमें उन्होंने कुल मिलाकर कुछ नहीं कमाया।
रिकॉर्ड क्या रखना है
- हर ख़रीद-बिक्री, तारीख़, मात्रा और रुपये में क़ीमत
- हर एक्सचेंज से TDS का स्टेटमेंट
- P2P लेन-देन के बैंक रेफ़रेंस
- वॉलेट से वॉलेट भेजे गए पैसे का रिकॉर्ड, ताकि उसे बिक्री न समझ लिया जाए
यह कैलकुलेटर एक लेन-देन का अनुमान देता है और सिर्फ़ समझाने के लिए है, यह टैक्स सलाह नहीं है। नियम बदलते रहते हैं और हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। ITR भरने से पहले किसी CA से ज़रूर पूछ लें।
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