SIM swap: आपका नंबर चोरी होकर पैसा कैसे जाता है
भारत में यह ठगी बढ़ रही है और बचाव आसान है। कैसे होती है, और OTP पर भरोसा करना क्यों बंद करना चाहिए।
यह ठगी तकनीकी नहीं है। इसमें कोई आपका फ़ोन नहीं हैक करता। ठग बस टेलीकॉम कंपनी को यक़ीन दिला देता है कि वह आप है।
होता कैसे है
पहले आपकी जानकारी जुटाई जाती है। नाम, जन्मतिथि, पता, शायद आधार का कोई हिस्सा। इसमें से ज़्यादातर या तो सोशल मीडिया पर पड़ा है या किसी पुराने डेटा लीक में।
फिर स्टोर जाकर या कॉल करके कहा जाता है कि सिम खो गया है, नया चाहिए। जाँच कमज़ोर रही तो नया सिम जारी हो जाता है।
उसी पल आपके फ़ोन का नेटवर्क चला जाता है, और आपका नंबर किसी और के फ़ोन में चालू हो जाता है।
उसके बाद क्या होता है
हर OTP अब उनके पास जाता है।
ईमेल का पासवर्ड रीसेट, फिर एक्सचेंज का पासवर्ड रीसेट, फिर withdrawal का OTP। पूरी चेन एक नंबर पर टिकी होती है, और वह नंबर अब उनका है।
आमतौर पर यह आधी रात को होता है, ताकि आप देर से जागें और उन्हें ज़्यादा वक़्त मिले।
सबसे ज़रूरी बचाव
SMS वाले OTP पर भरोसा करना बंद कीजिए।
एक्सचेंज पर 2FA के लिए authenticator ऐप लगाइए, जैसे Google Authenticator या कोई और। वह कोड आपके फ़ोन के अंदर बनता है, नेटवर्क से नहीं आता। सिम किसी और के पास चला भी जाए तो कोड उसे नहीं मिलेगा।
यह एक बदलाव इस पूरी ठगी को बेअसर कर देता है, और इसमें दस मिनट लगते हैं।
बाक़ी तीन चीज़ें
ईमेल को सबसे मज़बूत बनाइए। वही असली दरवाज़ा है। वहाँ भी authenticator ऐप वाला 2FA लगाइए।
टेलीकॉम कंपनी से SIM lock माँगिए। कई कंपनियाँ यह सुविधा देती हैं, जिसमें नया सिम जारी करने से पहले अतिरिक्त जाँच होती है।
सार्वजनिक जगह पर अपनी होल्डिंग की बात मत कीजिए। यह ठगी अक्सर उन्हीं लोगों पर होती है जिनके बारे में पहले से पता हो कि उनके पास कुछ है।
अगर नेटवर्क अचानक चला जाए
बिना वजह “No Service” दिखे और आसपास बाक़ी सबका नेटवर्क चल रहा हो, तो इंतज़ार मत कीजिए।
किसी और फ़ोन से तुरंत टेलीकॉम कंपनी को फ़ोन कीजिए, और साथ ही किसी दूसरे डिवाइस से एक्सचेंज में लॉगिन करके withdrawal रोकिए। यहाँ मिनट मायने रखते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
SIM swap में होता क्या है?
ठग आपकी जानकारी लेकर टेलीकॉम कंपनी से आपके नंबर का नया सिम जारी करवा लेता है। इसके बाद हर OTP उसके पास जाता है।
बचाव का सबसे अच्छा तरीक़ा क्या है?
SMS वाले OTP की जगह authenticator ऐप से 2FA लगाइए। वह कोड आपके फ़ोन में बनता है, नेटवर्क से नहीं आता, इसलिए सिम बदलने से फ़र्क़ नहीं पड़ता।