क्रिप्टो में ठगी के 6 आम तरीक़े, और हर एक की पहचान
भारत में क्रिप्टो से जुड़ी ठगी लगभग हमेशा इन्हीं छह शक्लों में आती है। हर एक की पहचान क्या है, और वह एक सवाल जो सबको रोक देता है।
ठगी के तरीक़े नए नहीं होते। बस हर साल नए नाम से आते हैं। ये छह शक्लें लगभग हर मामले में मिलती हैं, जो मेरे पास आता है।
1. गारंटीड रिटर्न
“हर महीने 10% पक्का।” कोई भी असली निवेश हर महीने पक्का रिटर्न नहीं दे सकता, क्योंकि बाज़ार पक्का नहीं होता। जो दे रहा है, वह या तो नए लोगों के पैसे से पुराने को दे रहा है, या कुछ भी नहीं दे रहा।
शुरू में पैसा आता भी है। वही तो जाल है, ताकि आप और डालें और दूसरों को बुलाएँ।
2. सपोर्ट बनकर मैसेज
आपने कहीं शिकायत लिखी, और तुरंत “सपोर्ट” का मैसेज आ गया। वह आपसे सीड फ़्रेज़, OTP या स्क्रीन शेयर माँगेगा।
कोई असली सपोर्ट कभी सीड फ़्रेज़ नहीं माँगता। कभी नहीं। यह एक ही नियम आपको आधी ठगी से बचा देगा।
3. नक़ली ऐप
Play Store पर भी नक़ली ऐप मिल जाते हैं, असली जैसा नाम और लोगो लेकर। आप लॉगिन करते हैं और जानकारी सीधे ठग के पास चली जाती है।
हमेशा एक्सचेंज की अपनी वेबसाइट से लिंक लेकर ऐप इंस्टॉल कीजिए, सर्च रिज़ल्ट से नहीं।
4. P2P में एस्क्रो के बाहर ले जाना
“सीधे भेज दो, ऑर्डर बाद में बना लेंगे।” इसका एक ही मक़सद होता है, एस्क्रो हटाना। एस्क्रो हटते ही आपके पास कोई सुरक्षा नहीं बचती। P2P की पूरी बात यहाँ लिखी है।
5. पहचान चुराकर की गई सिफ़ारिश
मेरे नाम और फ़ोटो से बने कई नक़ली टेलीग्राम अकाउंट चलते हैं। वे “प्राइवेट सिग्नल ग्रुप” में बुलाते हैं और पैसे माँगते हैं।
मैं किसी को व्यक्तिगत निवेश सलाह नहीं देता, और पैसे लेकर सिग्नल नहीं बेचता। मेरे असली अकाउंट यहाँ मिलेंगे। किसी और जगह से आया मैसेज मेरा नहीं है।
6. रोमांस और दोस्ती वाली ठगी
हफ़्तों बातचीत, फिर धीरे से एक “अच्छे प्लेटफ़ॉर्म” का ज़िक्र। शुरू में छोटा मुनाफ़ा दिखता भी है, निकाल भी लेते हैं। फिर बड़ी रक़म डालने पर सब बंद।
यह सबसे धीमी और सबसे महँगी ठगी है, क्योंकि इसमें भरोसा पहले बनाया जाता है।
वह एक सवाल
किसी भी मौक़े पर यह पूछिए:
अगर यह सच में इतना अच्छा है, तो मुझे क्यों बताया जा रहा है?
असली मौक़े अनजान लोगों को मैसेज करके नहीं बाँटे जाते। यह सवाल लगभग हर ठगी को रोक देता है।
हो गया हो तो
तुरंत cybercrime.gov.in पर शिकायत कीजिए और सारे स्क्रीनशॉट, ट्रांज़ैक्शन ID और बैंक रेफ़रेंस सँभालकर रखिए। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रुकने की गुंजाइश उतनी ज़्यादा रहती है। और शर्मिंदा मत होइए। यह बहुत समझदार लोगों के साथ भी हुआ है।