ITR में क्रिप्टो कैसे दिखाएँ: Schedule VDA आसान भाषा में
क्रिप्टो का मुनाफ़ा ITR में कहाँ भरना है, कौन-सा फ़ॉर्म चुनें, और किन दो जगहों पर लोग सबसे ज़्यादा ग़लती करते हैं।
टैक्स कितना लगता है, यह ज़्यादातर लोगों को पता है। असली उलझन तब शुरू होती है जब ITR भरने बैठते हैं और समझ नहीं आता कि यह सब लिखना कहाँ है।
पहले फ़ॉर्म सही चुनें
ITR-1 में Schedule VDA होता ही नहीं। अगर आपने क्रिप्टो बेचा है तो ITR-1 आपके लिए नहीं है, चाहे आपकी बाक़ी आमदनी कितनी भी सीधी हो।
ज़्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए ITR-2 सही रहता है। अगर आपका अपना कारोबार या पेशा है तो ITR-3। बस इतना सा फ़र्क़ है, पर ग़लत फ़ॉर्म चुनने पर पूरी फ़ाइलिंग दोबारा करनी पड़ती है।
Schedule VDA में क्या भरना है
हर बिक्री के लिए अलग लाइन। उसमें तीन चीज़ें जाती हैं: बिक्री की तारीख़, ख़रीद की क़ीमत, और बिक्री की क़ीमत।
यहीं पहली बड़ी ग़लती होती है। लोग साल भर का कुल मुनाफ़ा एक लाइन में लिख देते हैं। नियम ऐसा नहीं है। हर ट्रेड अपनी लाइन माँगता है, और अगर आपने साल भर में दो सौ ट्रेड किए हैं तो दो सौ लाइनें बनेंगी।
इसीलिए मैं बार-बार कहता हूँ कि रिकॉर्ड साल भर रखिए। जुलाई में पिछले बारह महीने याद करना सबसे महँगा तरीक़ा है।
दूसरी बड़ी ग़लती: TDS भूल जाना
1% TDS पहले ही कट चुका होता है। वह अलग से देने वाला टैक्स नहीं है, वह जमा किया हुआ पैसा है।
अगर आपने ITR में उसे claim नहीं किया, तो आपने वही रक़म दो बार दे दी। और कई बार तो TDS आपकी कुल देनदारी से ज़्यादा कट चुका होता है, यानी आपका रिफ़ंड बनता है जो आपने माँगा ही नहीं।
Form 26AS और AIS में जाकर मिला लीजिए कि कितना TDS दिख रहा है। एक्सचेंज की रिपोर्ट और विभाग के रिकॉर्ड में फ़र्क़ हो तो पहले वह सुलझाइए।
नुक़सान वाले ट्रेड भी भरिए
घटेंगे नहीं। न मुनाफ़े से, न सैलरी से, न अगले साल आगे जाएँगे। फिर भी भरने हैं।
वजह सीधी है। एक्सचेंज आपका डेटा विभाग तक पहुँचाते हैं। आपकी रिपोर्ट और उनके रिकॉर्ड में फ़र्क़ दिखे, तो सवाल उसी फ़र्क़ पर आता है, मुनाफ़े पर नहीं।
P2P और बिना KYC वाले एक्सचेंज
नियम वही हैं। कहाँ ट्रेड किया, इससे टैक्स नहीं बदलता।
फ़र्क़ सिर्फ़ यह है कि वहाँ कोई आपके लिए रिपोर्ट नहीं बना रहा। रिकॉर्ड पूरी तरह आपकी ज़िम्मेदारी है, और बैंक स्टेटमेंट में पैसा आता-जाता तो दिखता ही है।
एक आख़िरी बात
अगर आपने साल में सिर्फ़ ख़रीदा है, बेचा कुछ नहीं, तो कोई टैक्स नहीं बनता। टैक्स बिक्री पर लगता है, होल्ड करने पर नहीं। यह बात बहुत लोगों को बेवजह परेशान करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्रिप्टो के लिए कौन-सा ITR फ़ॉर्म भरें?
ज़्यादातर लोगों के लिए ITR-2, और अगर आपका कारोबार या पेशा है तो ITR-3। ITR-1 में Schedule VDA नहीं होता, इसलिए क्रिप्टो वाले उसमें नहीं भर सकते।
हर ट्रेड अलग से भरना पड़ता है?
हाँ, Schedule VDA में हर बिक्री की तारीख़, ख़रीद की क़ीमत और बिक्री की क़ीमत अलग-अलग जाती है। साल भर के कुल जोड़ से काम नहीं चलता।
नुक़सान वाले ट्रेड भी दिखाने हैं?
हाँ, दिखाने हैं। घटेंगे नहीं, पर छिपाना ग़लत रिपोर्टिंग है और एक्सचेंज का डेटा वैसे भी विभाग के पास पहुँचता है।